Being Women

Main Udne Lagi Hu

Like
Like Love Haha Wow Sad Angry
31

मैं उड़ने लगी हूँ के मेरे शब्दों को आवाज़ है

मैं उड़ने लगी हूँ के नई राह को आगाज़ है

मैं उड़ने लगी हूँ के सपनों को मिले अल्फाज़ हैं|

 

मैं उड़ने लगी हूँ के ऊमीदें बेहिसाब है

मैं उड़ने लगी हूँ के सतरंगी ख्वाब है

मैं उड़ने लगी हूँ के ये पल लाजवाब हैं|

 

मैं उड़ने लगी हूँ के वक़्त है ठेहरा

मैं उड़ने लगी हूँ के मुझपे है यादों का पेहरा

मैं उड़ने लगी हूँ के है असर गेहरा|

 

मैं उड़ने लगी हूँ के दिल में है कुछ एहसास है

मैं उड़ने लगी हूँ के जेसे छूटा कुछ खास है

मैं उड़ने लगी हूँ के कुछ पाने की प्यास है|

 

मैं उड़ने लगी हूँ के ये सफर है आखरी

मैं उड़ने लगी हूँ के हो रही है खलबली

मैं उड़ने लगी हूँ के अपने आशियाने को जा रही|

ALSO SEE :   Hunger
Like
Like Love Haha Wow Sad Angry
31
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Thoughts

To Top
More in Being Women, Inspirational Poetry, Poetry, कविताएं, हिन्दी
Rhythm of Life

The susurration of leaves falling in Fall The pitter-patter of ambrosial raindrops The whispers and whistles of the evening breeze...

Imposed Marriage and Women

Marriages are of many types and one of them is forced or imposed marriage. Here women are compelled to get...

Close